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कोणार्क सूर्य मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी, रहस्य, विशेषता और कैसे पहुंचे? | शिवॉलजी
What is the Konark Sun Temple? om swami gagan

क्या है कोणार्क सूर्य मंदिर?


01 May 2018
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कोणार्क सूर्य मंदिर

कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के उडीसा राज्य के कोणार्क में स्थित है। यह भव्य मंदिर सूर्य देव को समर्पित है और यह मंदिर देश के प्रसिद्ध तीर्थस्थलो में से एक है। इस मंदिर का निर्माण सूर्य देव के रथ के आकार में किया गया है। यह मंदिर मध्यकालीन वास्तुकला का अनोखा उदाहरण है।

 

कोणार्क मंदिर के बारे में

सूर्य मंदिर उडीसा राज्य के कोणार्क में स्थित है। यह मंदिर भारत के सात अजूबों में से एक है। कोणार्क शब्द, 'कोण' और 'अर्क' शब्दों से मिलकर बना है। अर्क शब्द का अर्थ होता है सूर्य, जबकि कोण का मतलब होता है कोने या किनारे। कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में गंगवंश के राजा नरसिंह देव ने करवाया था। इस मंदिर को भगवान सूर्य देव के रथ के आकार में बनाया गया है और इस रथ के कुल 24 पहिये है, साथ ही सात घोडे है। यह मंदिर लाल बलुआ और ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है।

 

कोणार्क मंदिर की विशेषता

कोणार्क सूर्य मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। 

सूर्य मंदिर समय की गति को दर्शाता है, जिसे सूर्य देवता नियंत्रित करते हैं।

पूर्व दिशा की ओर जाते हुए मंदिर के 7 घोड़े सप्ताह के सातों दिनों के प्रतीक हैं। 24 पहिए दिन के चौबीस घंटे को दर्शाते हैं।   

कुछ लोगों का मानना है कि 12 जोड़ी पहिए साल के बारह महीनों को दर्शाते हैं। पूरे मंदिर में पत्थरों पर कई विषयों और दृश्यों को मूर्तियाँ के द्वारा दर्शाया गया हैं।

पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र साम्बा को कोढ रोग का श्राप दिया था। इस श्राप के मुक्ति के लिए साम्बा जब मित्रवन में चंद्रभागा नदी में स्नान कर रहे थे, तो उन्हें पानी में सूर्य देव की एक मूर्ति मिली। साम्बा ने उस स्थान पर मूर्ति की स्थापना करवाई। जिसे आज सूर्य मंदिर के नाम से जाना जाता है।

बारह वर्षों तक साम्बा ने भगवान सूर्य की तपस्या की और सूर्य भगवान को प्रसन्न किया। उसके बाद साम्बा को श्राप से मुक्ति मिली।

 

कोणार्क मंदिर कैसे पहुँचे ?

कोणार्क उडीसा राज्य में स्थित है। भुवनेश्वर और पुरी जैसे प्रमुख शहरों से कोणार्क सडक द्वारा जुडा हुआ है। आइए जानते है कि कोणार्क कैसे पहुँच सकते है।

 

हवाई जहाज

अगर आफ हवाई जहाज के द्वारा जाते है, तो आप भुवनेश्वर हवाई अड्डे तक पहुंच सकते है, जहाँ से कोणार्क मात्र 64 किमी. दूर है।

रेल द्वारा

कोणार्क के आसपास कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। अगर आप रेल द्वारा जा रहे है, तो आपको पुरी रेलवे स्टेशन पर उतरना होगा और इस रेलवे स्टेशन से कोणार्क 31 किमी. दूर है।

सडक द्वारा

राज्य द्वारा चलाई जाने वाली बसें उडीसा और अन्य राज्यों से कोणार्क को सडक द्वारा जोड़ती है। भुवनेश्वर और पुरी से कोणार्क के लिए निजी बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

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